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अंकुश पंघाल ने रचा इतिहास, मेंस बॉक्सिंग में 8 साल बाद भारत को दिलाया गोल्ड मेडल

 Written By: Hitesh Jha
 Published : Oct 02, 2026 03:58 pm IST,  Updated : Oct 02, 2026 03:58 pm IST

एशियन गेम्स 2026 में भारत ने मुक्केबाजी में अपना तीसरा गोल्ड मेडल जीत लिया है। लवलीना और परवीन के बाद अब भारत के अंकुश पंघाल ने भी गोल्ड मेडल अपने नाम किया है।

Ankush Panghal- India TV Hindi
अंकुश पंघाल Image Source : PTI

भारत के लिए बॉक्सिंग के मैदान से एक और बड़ी खुशखबरी आई है। भारत ने एशियन गेम्स बॉक्सिंग में अपना छठा मेडल हासिल कर लिया है। 80 किलोग्राम वर्ग के फाइनल मैच में भारत के खिलाड़ी अंकुश पंघाल ने साउथ कोरिया के मुक्केबाज किन मिएनसांग को 4-0 से करारी शिकस्त देकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया। एशियन गेम्स में अंकुश का यह पहला गोल्ड मेडल है, वहीं पुरुषों की मुक्केबाजी में भारत को पूरे 8 साल बाद कोई गोल्ड मिला है। अंकुश का शानदार फॉर्म लगातार जारी है, क्योंकि इससे पहले उन्होंने 2026 के कॉमनवेल्थ गेम्स में भी जबरदस्त वापसी करते हुए गोल्ड मेडल जीता था। अंकुश की इस ऐतिहासिक जीत की बदौलत भारत अब मेडल तालिका में 5वें नंबर पर पहुंच गया है।

बॉक्सिंग में भारत को मिला छठा गोल्ड

एशियन गेम्स में बॉक्सिंग में भारत के लिए यह छठा पदक और कुल तीसरा गोल्ड मेडल है। अंकुश पंघाल से पहले लवलीना बोरगोहेन ने 75 किलोग्राम और परवीन हुडा ने 65 किलोग्राम भारवर्ग में गोल्ड मेडल जीता था। एशियन गेम्स के इतिहास में गोल्ड मेडल जीतने के मामले में भारतीय बॉक्सिंग टीम का यह अब तक का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन है। इस बार भारत ने 3 गोल्ड और 3 ब्रॉन्ज मिलाकर कुल 6 मेडल हासिल किए हैं। लवलीना, परवीन और अंकुश के अलावा प्रिया घंघास (60 कि.ग्रा.), कपिल पोखरिया (90 कि.ग्रा.) और नरेंद्र बेरवाल (+90 कि.ग्रा.) ने देश के लिए ब्रॉन्ज मेडल जीते। इससे पहले भारत ने साल 2010 के ग्वांगझू एशियन गेम्स में सबसे ज्यादा 9 मेडल जीते थे, लेकिन तब भारत के खाते में सिर्फ 2 ही गोल्ड आ पाए थे।

कौन हैं अंकुश पंघाल?

21 साल के अंकुश पंघाल हरियाणा के हिसार जिले के भेरिया गांव के रहने वाले हैं। उनका जन्म 13 अगस्त 2005 को एक किसान परिवार में हुआ था। अंकुश के पिता सुरेश पंघाल खेती-किसानी करने के साथ-साथ खेल से भी जुड़े हुए थे और वह कबड्डी के खिलाड़ी थे। शुरुआत में अंकुश भी कबड्डी ही खेलते थे और उन्होंने जिला स्तर पर इसमें गोल्ड मेडल भी जीता था। हालांकि, बाद में अपने पिता की सलाह मानकर उन्होंने कबड्डी छोड़कर बॉक्सिंग में कदम रखा। अब वह बॉक्सिंग रिंग में कमाल कर रहे हैं।

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